DM के औचक निरीक्षण में जिला अस्पताल की खुली पोल: बाहर की दवाएं लिखने से लेकर किचन की लापरवाही तक उजागर।

DM के औचक निरीक्षण में जिला अस्पताल की खुली पोल: बाहर की दवाएं लिखने से लेकर किचन की लापरवाही तक उजागर।

District hospital’s secrets exposed during DM’s surprise inspection: From prescribing outside medicines to kitchen negligence, everything was exposed.

संवाददाता: अक्षय चौधरी

मेरठ। मेरठ के पीएल शर्मा जिला अस्पताल में शनिवार दोपहर जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने सीएमओ डॉ. रामप्रसाद के साथ औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं, दवा वितरण और किचन व्यवस्था में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। खामियां मिलने पर जिलाधिकारी ने अस्पताल प्रबंधन, एसआईसी और संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई तथा तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।

 

निरीक्षण की शुरुआत इमरजेंसी वार्ड से हुई, जहां डीएम ने मरीजों से इलाज और दवाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी ली। कई मरीजों ने शिकायत की कि उन्हें अस्पताल के बजाय बाहर से दवाएं खरीदने के लिए लिखा जा रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अस्पताल में उपलब्ध दवाओं का ही अधिकतम उपयोग किया जाए। यदि कोई दवा उपलब्ध न हो तो उसका वैकल्पिक विकल्प मरीज को दिया जाए और विकल्प भी न होने पर ही नियमानुसार बाहर की दवा लिखी जाए।

 

अस्पताल परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली। इस पर संबंधित एजेंसी को नोटिस जारी कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। वहीं फार्मेसी स्टोर के निरीक्षण में पाया गया कि स्टॉक रजिस्टर लंबे समय से अपडेट नहीं था, जिससे दवाओं का मिलान करने में कठिनाई हुई। डीएम ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) को आंतरिक जांच कर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

 

निरीक्षण के दौरान अस्पताल की किचन व्यवस्था भी सवालों के घेरे में रही। किचन में खाद्य सामग्री का पर्याप्त स्टॉक नहीं मिला और स्टॉक रजिस्टर का रखरखाव भी संतोषजनक नहीं पाया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मरीजों के भोजन के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री का पर्याप्त भंडारण रखा जाए तथा गुणवत्ता और मात्रा की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

 

किचन प्रभारी की कार्यप्रणाली पर भी डीएम ने नाराजगी जताई। स्टोर रजिस्टर की जांच में पिछले चार महीने से प्रभारी के हस्ताक्षर नहीं मिले। इस पर जिलाधिकारी ने एसआईसी को निर्देश दिए कि ऐसे गैर-जिम्मेदार कर्मचारी को तत्काल महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से हटाया जाए और पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय की जाए।

 

जिलाधिकारी ने जब मरीजों के भोजन की जानकारी ली तो बताया गया कि 125 मरीजों और उनके एक-एक तीमारदार के लिए भोजन तैयार होना है। मौके पर रखी कटी हुई सब्जी का वजन कराया गया, जो मात्र साढ़े नौ किलो निकली। इसे पर्याप्त न मानते हुए डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर जल्द विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने और व्यवस्था सुधार के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने के निर्देश दिए।

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