राष्ट्रीय काव्य संग्रह मंच की संगोष्ठी का आयोजन बड़े सुचारू रूप से सम्पन्न हुआ।

राष्ट्रीय काव्य संग्रह मंच की संगोष्ठी का आयोजन बड़े सुचारू रूप से सम्पन्न हुआ।

The National Poetry Collection Forum’s seminar was organised very smoothly.

Meerut cheenu chaudhary

 

 

अध्यक्षता ईश्वर चंद गंभीर ने की मुख्य अतिथि सतीश सहज रहे।

विशिष्ट अतिथि , दीवान गिरी गोस्वामी, गोपाल जानम, डॉ सुदेश यादव दिव्य कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख डॉ नीलम मिश्रा ईश्वर चंद गंभीर दीवान गिरी गोस्वामी डॉ सुदेश यादव दिव्य प्रदीप अग्रवाल अवनीश सिंघल , मंगल सिंह मंगल ने दीप प्रज्ज्वलित कर

वंदना प्रस्तुत की

डॉ सुदेश दिव्य यादव की

 संचालन डॉ नीलम मिश्रा तरंग द्वारा किया गया।

गोपाल जानम ने कहा

तूने तो मुस्कुरा के मुझसे यही कहा था

हर शाम मिला करूंगी क्या तेरे शहर में अब शाम नहीं होती

नीलम मिश्रा तरंग ने कहा

आंसू के आने पर उल्लास लिखना है

पतझर के माथे पर मधुमास लिखना है।

कल्पना के पखेरू को उड़ने से मत रोको

लिख पाओ तो जीवन का इतिहास लिखना है।

गंभीर जी ने यूं कहा

होली खेली होली खेली जमके खेलो।

 लेकिन इतना ध्यान रहे भैया भी नाराज ना हो।

 भाभी का सम्मान रहे।

सतीश सहज ने कहा

तन बदन रंगीन कर लें इस निराले रंगीले फाग में

 सभी गिले शिकवे जला दें होलिका की आग में ।

कमलेश तन्हा ने कहा

उनका इस दौर में किस तरह गुजारा होगा

जिनको हाला ने मेरी तरह मारा होगा।

अवनीश सिंघल ने कहा

आप आए तो बहारों का समा होता है

दूसरा फिर आप सा ना कोई वहां नहीं होता है।

मंगल सिंह मंगल ने कहा

प्रदीप अग्रवाल ने कहा

सुदेश यादव दिव्य ने पढ़ा

आ रहा है ऐसा जमाना बात सुन लो काम की।

रचना बानिया ने यूं कहा

सीमा गुप्ता ने पढ़ा

जिसे देखा नहीं कभी उफ करते हुए

जिसे देखा नहीं कभी थकते हुए

संजीव त्यागी ने कहा हास्य पढ़ कर खूब तालियां बटोरी

डॉ आशा त्यागी नीरज शर्मा रीना खेड़ा, वीना मंगल ,साधना, गिरीश मोजूद रहे,

 काव्य पाठ किया

अंत अंत में अमित सिंघल ने सबका आभार व्यक्त किया

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